Saturday, March 2, 2019

कंप्यूटर सॉफ्टवेर क्या होता है?

आपका सवागत है, आज हम यहाँ पर बात करने जा रहें हैं software के बारे में | हमें उम्मीद है कि आपको हमारी अन्य पोस्ट की तरह यह पोस्ट “कंप्यूटर सॉफ्टवेर क्या होता है?” भी पसंद आएगी  |

कंप्यूटर सॉफ्टवेर क्या होता है?


सॉफ्टवेर क्या है?

Software के बारे में जानने से पहले हमें थोडा कंप्यूटर के बारे में जानना होगा | कंप्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जो software और hardware के समायोजन से कार्य करती हैं | hardware में वो सब आता है जो हमे दिखाई देता हैं जैसे कीबोर्ड, माउस, मोनिटर, स्पीकर आदि  और Software में वे सब आते हैं जो हमें दिखाई नहीं देता लेकिन काम करता हैं |
जैसा कि मैंने ऊपर बताया कि कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जो सिर्फ वही कार्य करता हैं जो हम उससे करवाना चाहते हैं | अब जानने वाली बात यह है कि हम किस तरह से कंप्यूटर से कार्य करवा सकते हैं, तो आप सोच रहे होंगे कि हम कीबोर्ड में कोई की टाइप करते हैं तो वह स्क्रीन पर प्रिंट हो जाती हैं और इस तरह हम कोई भी कार्य कंप्यूटर से करवा सकते हैं | किन्तु दोस्तों ऐसा नहीं हैं |
कंप्यूटर को हर कार्य के लिए पहले से निर्देश दिया गया होता हैं ताकि हम जो कार्य कंप्यूटर से करवाना चाहे वह हो जाये | कंप्यूटर में  कहीं न कहीं उसकी language में लिखा होगा कि जब भी कोई A टाइप करे तो वह स्क्रीन पर भी A को दिखाए | इसी तरह कंप्यूटर में हर कार्य के लिए पहले से ही उसे निर्देश दिए होते हैं | ज्यादातर निर्देश कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम में दिए गए होते हैं, और ऑपरेटिंग सिस्टम कई सारे software का एक समूह होता हैं |

सॉफ्टवेर का क्या कार्य है?

सॉफ्टवेर सिर्फ वही कार्य करता हैं जो हम प्रोग्रामिंग के द्वारा कंप्यूटर को बताते हैं | जैसे एक software हैं tally अब इस software को बनाते वक्त programming के माध्यम से कंप्यूटर को बताया गया है कि उसे किस तरह एक account को manage करना हैं, अब जब भी कोई user tally के माध्यम से अपना लेखा-जोखा कंप्यूटर में दर्ज करेगा तो यह software account से जुड़े सभी कार्य आसानी से कर लेगा |
ऐसे लाखों software मार्केट में हैं जिनसे अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग कार्य किया जाता हैं |

सॉफ्टवेर कैसे बनते हैं?

सॉफ्टवेर बनाने के लिए  प्रोग्रामिंग का बहुत अधिक नॉलेज होना जरुरी है | ऐसी कई  सारी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज हैं जिनके माध्यम से सॉफ्टवेर बनाये जा सकते हैं जैसे C, C++, Java, VB.Net और भी कई हैं लेंकिन आपको पहले यह जानना जरुरी हैं कि आपको किस तरह का software बनाना है उससे क्या कार्य होगा और वह किस एक कंप्यूटर के लिए बनाना हैं या कई कंप्यूटर के लिए बनाना हैं |  ऐसी कई सारी बातों का ध्यम रखना होता हैं फिर उसके अनुसार programming language को चुन कर software बनाया जा सकता है |
सॉफ्टवेर कई तरह के होते हैं मुख्यतः 2 प्रकार के सॉफ्टवेर हैं जैसे एक वह software जो किसी कंप्यूटर पर कार्य करेगा वह और दूसरा वह जो इन्टरनेट पर कार्य करेगा | ऐसे software जो internet पर कार्य करने के लिए बनाये जाते हैं वह Web software कहलाते हैं और उन्हें PHP, Java, HTML, आदि web प्रोग्रामिंग की मदद से बनाया जाता हैं |
आज की हमारी इस पोस्ट “कंप्यूटर सॉफ्टवेर क्या होता है?” में इतना ही | आप इस वेबसाइट पर कंप्यूटर एवं इन्टरनेट से जुड़ीं कई जानकारी प्राप्त कर सकते हैं | आप हमसे कमेंट के  माध्यम से किसी भी तरह का सवाल पूछ सकते हैं | अगर आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना  भूलें | धन्यवाद !

हार्डडिस्क क्या हैं, इसका क्या कार्य हैं?

आज हमारी इस छोटी सी पोस्ट में हम बहुत बड़े टॉपिक पर बात करने जा रहे हैं | आज का हमारा विषय हैं हार्डडिस्क | क्या आप जानते हैं कि हार्डडिस्क क्या हैं, इसका क्या कार्य हैं? अगर नहीं तो चिंता की कोई बात नहीं आज हम इस विषय पर आपको पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे |

हार्डडिस्क क्या हैं, इसका क्या कार्य हैं?


हार्डडिस्क कंप्यूटर का एक अति महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बिना हार्डडिस्क कंप्यूटर की किसी काम का नहीं होता| आप जब भी कंप्यूटर खरीदने जायेंगे या कंप्यूटर की जानकारी लेंगे तो आपको RAM और Harddisk इन दो के बारे में सबसे पहले पूछा जायेगा तो आपको इसकी जानकारी होना चाहियें | आइये जानते हैं क्या हैं हार्डडिस्क और इसके क्या कार्य हैं | हार्डडिस्क क्या हैं, इसका क्या कार्य हैं?

हार्डडिस्क क्या है ? What is hard disk in Hindi

हार्डडिस्क जिसे HDD के नाम से भी जानते हैं वह एक ऐसा हार्डवेयर हैं जहाँ हम हमारा किसी भी तरह का डाटा सुरक्षित रख सकते हैं | जैसे आपने कंप्यूटर में कोई मूवी डाउनलोड की अब वह डाउनलोड होने के बाद आपके कंप्यूटर में कहीं तो सेव होती | जहाँ वह मूवी सेव होगी वही हार्डडिस्क हैं | इसका सीधा सा मतलब हैं कि हार्डडिस्क आपके हर तरह के डाटा को हमेशा के लिए सेव करके रखने के लिए होती हैं जब तक आप उसे डिलीट नहीं करते |

हार्डडिस्क कितने प्रकार की होती है ?

हार्डडिस्क मुख्यतः 2 प्रकार की होती हैं |
  • HDD
  • SSD
HDD : यह एक प्रकार की physical drive होती हैं जो कि इसके अन्दर ठीक उसी तरह डाटा सेव होता है जैसे किसी CD को write करते वक्त होता हैं | इसमें डाटा सेव या कॉपी होते वक्त एक drive 7200 rpm की स्पीड घुमती है जो हार्डडिस्क पर निर्भर करता हैं जो कम या ज्यादा हो सकता हैं | इस तरह की ड्राइव हमारे कंप्यूटर या लैपटॉप में लगी होती हैं |
SSD : SSD यानि Solid State Drive भी एक हार्डडिस्क ही हैं बस फर्क इतना है कि यह किसी डाटा को physically कॉपी या स्टोर नहीं करती जबकि इसमें एक इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होती हैं जिससे यह HDD की तुलना में कम पॉवर में एवं बहुत तेजी से कार्य  करती हैं | इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह काफी छोटे आकार की होती हैं इसी कारण आजकल MacBook एवं कुछ laptop में यह use की जाती हैं |

 एक्सटर्नल हार्डडिस्क क्या है? external harddisk kya hai

external हार्डडिस्क एक छोटी सी हार्डडिस्क होती हैं जो कि usb के द्वारा हमारे कंप्यूटर में ठीक वैसे ही कनेक्ट हो जाती हैं जैसे हम किसी pendrive को कनेक्ट करते हैं | Pendrive की क्षमता 4GB , 8GB या अधिकतम 128 GB तक होती हैं किन्तु एक external हार्डडिस्क की क्षमता काफी ज्यादा हो सकती है जो TB में होती हैं |
जब हमे काफी सारा डाटा हमारे कंप्यूटर में ना रख कर एक अलग ड्राइव में रखना हो तो उसके लिए external हार्डडिस्क सही होती हैं इसे हम कही भी आसानी से ले जा सकते हैं और किसी भी कंप्यूटर में जोड़ सकते हैं 

रेम और हार्डडिस्क में क्या अंतर हैं ?

यह एक बहुत ही आम सवाल हैं जो कि कंप्यूटर खरीदते वक्त बहुत से लोग जानना चाहते हैं | Ram और harddisk दोनों में ही डाटा सेव होता हैं किन्तु जो डाटा हार्डडिस्क में सेव होता हैं वह परमानेंट तब तक सेव रहता है जब तक हम उसे डिलीट नहीं कर देते | किन्तु रेम में ऐसा नहीं होता | 
रेम जिसकी मेमोरी काफी छोटी होती हैं जो कि अधिकतर 8 GB है फ़िलहाल में उसमे सिर्फ 8 GB तक का डाटा आ सकता हैं लेकिन उसमें हम कोई डाटा सेव नहीं कर सकते | जब हम कोई सॉफ्टवेर पर काम कर रहे होते हैं तो वह software चलने के लिए जितनी जगह लगती हैं वह रेम उसे  उपलब्ध कराती हैं | और कंप्यूटर बंद होने पर फिर से रेम खाली हो जाती हैं यानि सारा डाटा डिलीट हो जाता हैं और हमे वह सॉफ्टवेर फिर से चलाना होता है |
तो दोस्तों आपको हमारी आज की यह पोस्ट “हार्डडिस्क क्या हैं, इसका क्या कार्य हैं?” कैसी लगी हमें जरुर बताएं कमेंट के माध्यम से ताकिm और बेहतर जानकारी आपको उपलब्ध करा सकें |आप इस पोस्ट को आपने दोस्तों में भी शेयर कर सकते हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को हिन्दी में कंप्यूटर की जानकारी मिल सके| धन्यवाद !

Ram, रेम क्या हैं एवं इसका क्या कार्य हैं?

आज का हमारा विषय हैं RAM, अगर आप कंप्यूटर सीखना चाह रहे है तो आपको सबसे पहले कंप्यूटर की सरंचना को समझना होगा|  इस वेबसाइट के माध्यम से हम हर एक टॉपिक पर विस्तार से चर्चा कर रहें हैं ताकि आप हर छोटी से छोटी बातों को सीख सकें | आज हम पढेंगे कि Ram, रेम क्या हैं एवं इसका क्या कार्य हैं? आइये शुरू करते हैं |
RAM का अर्थ हैं Random access memory यानि ऐसी memory जो कंप्यूटर के स्टार्ट होने पर load होती हैं और computer band हो जाने पर खाली हो जाती हैं | आप इसको इस तरह से समझ सकते हैं कि जब भी हम कोई software चलाते हैं तो वह हमारी हार्डडिस्क से निकलकर ram में load हो जाता हैं | यह आपके कंप्यूटर में कम GB में होती है जैसे 2 GB, 4GB, 6B आजकल नए नए कंप्यूटर में यह memory 8 GB तक भी होती है |

Ram, रेम क्या हैं एवं इसका क्या कार्य हैं?

Ram, रेम क्या हैं एवं इसका क्या कार्य हैं?

रेम का क्या कार्य है | Rem ka kya kary hai

रेम का मुख्य कार्य आपको किसी भी application या software चलाने के लिए एक space provide करना होता है |  मान  लो हमारी ram 4 GB की है अब हमने कोई software run किया जो 500 MB का हैं तो वह हमारी Ram में load हो जायेगा और हमारी ram 3.5 GB खाली रह जाएगी ऐसी ही हम Ram फुल हो जाने तक software हमारे कंप्यूटर मी आसानी से चला सकते हैं |
यहाँ यह समझ में आता है कि जितनी ज्यादा ram होगी हमारे कंप्यूटर में हम उतने ही अधिक software एक साथ चला सकते हैं| इसके आलावा अगर हमारे कंप्यूटर में ram कम होगी तो हम ज्यादा software नहीं चला सकेंगे और जल्द ही हमारी Ram full हो जाएगी जिससे हमारा कंप्यूटर की गति भी धीमी हो जाएगी |

रेम कितने प्रकार की होती है | Ram kitne prakar ki hoti hai

रेम मुख्यतः 2 प्रकार की होती है
  1. SRAM (स्टेटिक रेम)
  2. DRAM (डायनामिक रेम)
स्टेटिक रेम (SRAM)
  • Power बंद होते ही इसकी memory delete हो जाती है |
  • DRAM के मुकाबले यह ज्यादा महँगी होती है |
  • DRAM के मुकाबले ज्यादा तेज गति से कार्य करती है |
  • इसमें किसी केपेसिटर का प्रयोग नहीं होता है|
  • DRAM के मुकाबले इसमें ज्यादा चिप्स का उपयोग किया जाता है|
  • इसे कैश मेमोरी की तरह उपयोग किया जाता है|
डायनामिक रेम (DRAM)
  • यह SRAM के मुकाबले सस्ती होती है|
  • इसे आम तौर पर सिस्टम मेमोरी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है|
  • इसे उन मेमोरी सेल से बनाया जाता है जिसमें एक ट्रांजिस्टर और एक केपेसिटर होता है|
  • SRAM के मुकाबले यह धीमे कार्य करती है |
  • इसे रेम के रूप में प्रयोग किया जाता है|
तो दोस्तों मुझे उम्मीद है कि RAM के बारे में आपको यहाँ अच्छी जानकारी मिली होगी | इस वेबसाइट के माध्यम से हमारा प्रयास आपको कंप्यूटर एवं इन्टरनेट से जुडी हर जानकारी प्रदान करना हैं | आप इस पोस्ट या किसी अन्य पोस्ट के बारे में अपनी राय हमसे कमेंट के माध्यम से शेयर कर सकते है | Ram, रेम क्या हैं एवं इसका क्या कार्य हैं?

कंप्यूटर में इनपुट-आउटपुट (Input-Output) डिवाइस क्या होती हैं

जब भी आपने कंप्यूटर सीखने या इससे जुड़ी कोई बात सुनी होगी तब इनपुट एवं आउटपुट यह नाम आपने काफी सुना होगा आइये जानते हैं कि क्या हैं Input एवं Output आज की हमारी इस पोस्ट “कंप्यूटर में इनपुट-आउटपुट (Input-Output) डिवाइस क्या होती हैं”    के माध्यम से |

कंप्यूटर में इनपुट-आउटपुट (Input-Output) डिवाइस क्या होती हैं

कंप्यूटर में इनपुट-आउटपुट (Input-Output) डिवाइस क्या होती हैं
शुरू करने से पहले हम संक्षिप्त में यह जानेगें कि कंप्यूटर क्या हैं और उसका क्या कार्य हैं |

कंप्यूटर क्या हैं ?

कंप्यूटर का अविष्कार कई वर्षों पहले सिर्फ गणना करने के लिए किया गया था, कंप्यूटर का हिन्दी नाम संगणक भी  इसी कारण हैं | समय के साथ साथ इसमें विकास होता गया और आज आप देख सकते हैं कि कंप्यूटर क्या बन गया हैं, कैसे बड़े से बड़े काम कंप्यूटर द्वारा आसानी से पुरे हो जाते हैं | कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं जिसे प्रोग्रामिंग के द्वारा हम बता सकते हैं कि उसे क्या करना हैं और कंप्यूटर सिर्फ वह काम करता हैं जो हमने उसे बता रखा हैं |

कंप्यूटर के क्या कार्य हैं ?

आज के इस समय में लगभग हर काम कंप्यूटर द्वारा किया जाता हैं जैसे, डॉक्यूमेंट बनाना, ईमेल भेजना, मोबाइल टीवी रिचार्ज करना, खाते का हिसाब रखना, लेन-देन करना, फोटो, विडियो, ग्राफिक्स आदि ऐसे कार्य हैं जो आजकल कंप्यूटर द्वारा किये जाते हैं, कंप्यूटर का उपयोग आजकल छोटे से लेकर बड़े हर कार्यालयों में भी होने लगा हैं जिसमे पोस्ट ऑफिस, नगर निगम, ग्राम पंचायत, बैंक, रेलवे आदि विभाग शामिल हैं जो अब पूरी तरह कंप्यूटर पर आधारित कार्य करते हैं |

Input device | इनपुट डिवाइस क्या होती हैं ?

जैसा कि मैंने आपको ऊपर  बताया कि कंप्यूटर सिर्फ वही कार्य करता हैं जो यूजर यानि हमारे द्वारा बताया गया होता हैं | जब हम कंप्यूटर को  कोई कोई निर्देश देते हैं तो हमे कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए किसी डिवाइस की जरुरत होती हैं वही डिवाइस इनपुट डिवाइस कहलाती हैं | जैसे यदि हम कंप्यूटर में कोई शब्द टाइप करना चाहते हैं तो उसके लिए हमें कीबोर्ड की आवश्यकता होती हैं |
एक आसान भाषा में कहें तो कंप्यूटर का हर वह पार्ट जिसके माध्यम से हम कंप्यूटर को निर्देश देते हैं वह इनपुट डिवाइस कहलाती हैं जैसे :
कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, CD ड्राइव, कैमरा, कार्ड रीडर, माइक आदि |

Output device | आउटपुट डिवाइस क्या होती हैं ?

जिस तरह कंप्यूटर में इनपुट डिवाइस का महत्त्व होता है ठीक वैसा ही आउटपुट डिवाइस का भी होता हैं | हर वह डिवाइस जिससे यूजर को यानि हमे कंप्यूटर द्वारा कोई रिजल्ट या रिस्पोंस मिले तो वह डिवाइस आउटपुट डिवाइस कहलाती हैं | जैसे कंप्यूटर की स्क्रीन जो कि सबसे बड़ी आउटपुट डिवाइस हैं |
इसके आलावा कई सारी आउटपुट डिवाइस होती हैं जिनका अलग-अलग कार्य होता हैं |
स्क्रीन (मोनिटर), प्रिंटर, स्पीकर, प्रोजेक्टर आदि |
तो देखा आपने क्या होता हैं इनपुट और आउटपुट| हमें उम्मीद हैं कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी | आप हमारी इस पोस्ट “कंप्यूटर में इनपुट-आउटपुट (Input-Output) डिवाइस क्या होती हैं” से जुड़े किसी भी तरह के सवाल-जवाब के लिए हमसे कमेंट  के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं |

कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux – Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें

जैसा कि आपने हमारे पिछले आर्टिकल लिनक्स क्या हैं : इसके फायदे एवं कमियां में लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम की जानकारी प्राप्त की | उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज हम सीखेंगे कि लिनक्स हमारे कंप्यूटर  में  लिनक्स इनस्टॉल कैसे करें | हमें उम्मीद हैं कि आपको इस आर्टिकल “कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux – Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें” में लिनक्स (उबुन्तु) इनस्टॉल करने सम्बन्धी पूरी जानकारी मिलेगी |

उबुन्तु (Ubuntu) क्या हैं ?

आर्च, फेडोरा, रेडहेड, उबुन्तु, मंड्रिवा, कुबन्तु और ऐसी ही कई नाम आपने सुने होंगे ले सब लिनक्स वितरण  (Linux distribution Software) हैं |इन सब डिस्ट्रीब्यूशन में कुछ ना कुछ विशेषतायें हैं जैसे  इन्हीं में से एक प्रचलित वितरण हैं Ubuntu जो सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है. आज हम उसी को इंस्टाल करना सीखेंगे | 

उबुन्तु (Ubuntu) डाउनलोड कैसे करें ?

अगर आप आपके कंप्यूटर में Ubuntu इनस्टॉल करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको इसे डाउनलोड करना होगा | यह करीब 1.4 GB का होगा जिसे आप इस लिंक के द्वारा download करना होगा : https://www.ubuntu.com/download/desktop यहाँ पर आपको सबसे लेटेस्ट संस्करण जो दिखाई दे उसे डाउनलोड करें |
Note : Ubuntu download करने से पहले ध्यान रखें आपका कंप्यूटर Recommended system requirements पूरी  करता हैं या नहीं.
एक बार जब उबुन्तु डाउनलोड हो जाये तो आपको उसकी डीवीडी बर्न करना होगी या बूटेबल युएसबी स्टिक बनाना होगी | आप यहाँ से सीख सकते हैं कि Bootable DVD या USB कैसे बनायें . 

उबुन्तु (Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें?

जब आप बुटेबल डीवीडी या युएसबी बना लेन तो उसे अपने computer में लगायें एवं कंप्यूटर को रीस्टार्ट करें, अब आपका कंप्यूटर लगाई गई बुटेबल को रीड करेगा.अगर ऐसा स्वतः ना हो तो आप जब कंप्यूटर स्टार्ट हो रहा हो तब F12 दबाकर सबंधित डिवाइस चुन सकते हैं |

कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux – Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें

कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux - Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें
यहाँ पर आपको 2 Option दिखाई दे रहे हैं पहला Try Ubuntu और दूसरा Install Ubuntu.
यदि आप Ubuntu को बिना इनस्टॉल किये बिना चलाना चाहते हैं तो आप पहले Option को select कर सकते हैं. इस विकल्प  को select करने के कुछ ही seconds में आपके PC पर Ubuntu चल  ने लगेगा, आप इसकी Home screen पर पहुँच जायेंगे और इसकी पूरी विशेषताओं के साथ इसे चला सकेंगे | कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux – Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें
दूसरा आप्शन हैं Install Ubuntu जिससे आप आपके कंप्यूटर पर इसे इनस्टॉल कर सकेंगे | अगर आप Install करना चाहते हैं इसे तो language select करने के बाद दुसरे option पर क्लिक करें.
अब आपके सामने एक स्क्रीन खुलेगी जो इस तरह होगी
कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux - Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें

अगर आपके कंप्यूटर में इन्टरनेट कनेक्ट हैं तो यहाँ पर आपको दो आप्शन दिखाई देंगे जिन्हें select कर लें, इससे installation के बाद अपडेट होने में लगने वाला समय बचेगा एवं आपका उबुन्तु तुरंत उपयोग के लिए रेडी हो जायेगा |  अब continue पर क्लिक करके आगे बढ़ने पर आपसे यह  पूछा जायेगा कि आपको Ubuntu कहाँ इनस्टॉल करना हैं |
कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux - Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें

लिनक्स इनस्टॉल करने का तरीका 

पहला आप्शन जो select हैं उसे ही select रहने देंगे और आगे बढ़ेंगे तो आपकी हार्ड डिस्क पूरी तरह क्लीन होकर नया ऑपरेशन सिस्टम इनस्टॉल हो जायेगा |
Something else को select करके आप हार्डडिस्क में पार्टीसन बनाकर जहाँ चाहें वहां ubuntu इनस्टॉल कर सकते हैं |
इसके बाद Install Now का बटन दबाएँ एवं आगे बढ़ें, आगे की स्क्रीन में आपसे Location (time-zone) एवं language पूछी जाएगी जहाँ आपको time zone में Kolkata (इंडिया के लिए) एवं language English select करके आगे बढ़ना हैं |
कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux - Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें
अब आपको ऊपर दिखाई दे रही स्क्रीन दिखाई देगी जहाँ आपको password select करना होगा | password select करके आप continue पर क्लिक करेंगे तो ubuntu इंस्टालेशन शुरू हो जायेगा जो कुछ देर चलता रहेगा, इस दौरान आपके कंप्यूटर/लैपटॉप पर यह स्क्रीन दिखाई देगी |
कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux - Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें

इंस्टालेशन कम्पलीट होने के बाद आपको रीस्टार्ट का मेसेज दिखाई देगा, जिससे आप आपका कंप्यूटर रीस्टार्ट कर सकते हैं | अगर आपको यह मेसेज दिखाई दे रहा हैं तो आपका इंस्टालेशन कम्पलीट हो गया समझिये |
कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux - Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें
Credit : ubuntu.com 
आज के इस आर्टिकल में इतना ही | आप हमारी इस पोस्ट “कंप्यूटर में उबुन्तु (Linux – Ubuntu) कैसे इनस्टॉल करें” के  बारे में अपनी राय कमेंट के माध्यम से बता सकते हैं साथ ही कोई सवाल हो वह भी कमेंट में पूछ सकते हैं 

किसी भी अंग्रेजी (English) वेबसाइट को हिन्दी में कैसे पढ़ें?

इन्टरनेट पर अधिकतर वेबसाइट अंग्रेजी (English) में ही होती हैं, क्या आप जानते हैं कि हम किसी भी अंग्रेजी वेबसाइट को भी बड़ी आसानी से हिन्दी में पढ़ सकते हैं? आइये जानते हैं आज कि हमारी इस छोटी सी पोस्ट “किसी भी अंग्रेजी (English) वेबसाइट को हिन्दी में कैसे पढ़ें?” में |
किसी भी अंग्रेजी वेबसाइट को Hindi में पढ़ने के लिए हम जो ट्रिक यहाँ बता रहें हैं वह हैं Google chrome ब्राउज़र पर काम करेगी | तो यह सुनिश्चित करें कि आप जो भी वेबसाइट English से Hindi में translate करके पढ़ना चाहते हैं वह आप google chrome में ही खोलें |
Step : 1 यहाँ दी गई लिंक के द्वारा आप Google chrome के web store पर जा सकते हैं |

किसी भी अंग्रेजी (English) वेबसाइट को हिन्दी में कैसे पढ़ें?
Step : 2  यहाँ पर आपको Google translator टाइप करना हैं और दिखाई दे रहे Google translator को install करना हैं |
किसी भी अंग्रेजी (English) वेबसाइट को हिन्दी में कैसे पढ़ें?
Step : 3 अब आपको Add to chrome पर क्लिक करना हैं जिससे आपके google chrome में google translate का एक्सटेंशन्स जुड़ जायेगा |
आप हमारी वेबसाइट पर कंप्यूटर से जुडी अन्य जानकरी भी पा सकते है. : 
किसी भी अंग्रेजी (English) वेबसाइट को हिन्दी में कैसे पढ़ें?
अब आप इसके द्वारा किसी भी वेबसाइट जो इंग्लिश में हैं उसे बड़ी ही आसानी से हिन्दी या किसी अन्य भाषा में पढ़ सकते हैं |
आज की हमारी इस पोस्ट “किसी भी अंग्रेजी (English) वेबसाइट को हिन्दी में कैसे पढ़ें?” में इतना ही | आप हमारी वेबसाइट को subscribe कर सकते हैं ताकि हमारी हर नई पोस्ट आपको समय समय पर ईमेल में प्राप्त होती रहें |

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं : इसके फायदें एवं कमियां

Computer sikhe में आज हम बात करेंगे एक बेहद प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम Linux की | लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं : इसके फायदें एवं कमियांअगर आप जानना चाहते हैं तो आपको यह आर्टिकल जरुर पढ़ना चाहियें | हमें उम्मीद हैं कि यह पोस्ट एवं लिनक्स से जुड़ी हमारी अन्य पोस्ट आपको लिनक्स को समझने में मदद करेंगी |
लिनक्स के बारे में हम आगे पढ़ें उससे पहले आपको ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकारी होना जरुरी हैं | अगर आप जानते हैं कि ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है एवं यह कैसे कार्य करता हैं तो आप आगे पढ़ सकते हैं, अन्यथा आप हमारे इस लेख को जरुर पढ़ें : ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता हैं, इसके क्या कार्य हैं |
लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं : इसके फायदें एवं कमियां

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं : इसके फायदें एवं कमियां

लिनक्स एक बेहद आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जिसे सन 1991 में  लिनूस टोरवाल्ड जो कि फिनलैण्ड के हेलसिन्की विश्‍वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस के छात्र थे उन्होंने यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के छोटे संस्करण मिनिक्स का विकास करके इसे बनाया था | इस ऑपरेटिंग सिस्टम को बनाने के बाद इसेक कोड भी पब्लिश कर दिए गए जिससे यह एक ओपन सोर्से ओ एस बन गया और इसके सबसे बड़ी विशेषता ही यह हैं |
ओपन सोर्से होने के कारण इसमें समय समय पर कई बदलाव किये गए एवं आज भी किये जा रहे हैं | ग्नू सार्वजनीक लाइसेंस (GPL) के तहत  इसे कोई भी एडिट कर सकता हैं, जी हाँ आप भी इसे एडिट कर सकते हैं | इसके आलावा  इस ऑपरेटिंग सिस्टम में ना तो कोई बग ज्यादा देर तक रह पाती हैं एवं ना ही यह कभी क्रैस या हैंग होता हैं, इसका कारण यही है कि एक साथ हजारों लोगों द्वारा इसमें सुधार किया जाता हैं |

लिनक्स की विषेशता एवं फायदे | Linux ke fayde

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोग करने के कई सारे फायदे हैं जो इस तरह हैं |
  • Secure | सुरक्षित : अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम की तुलना में यह काफी सुरक्षित हैं | इसमें वायरस / मैलवेयर आने की संभावना बहुत कम या ना के बराबर होती हैं यही कारण हैं कि अधिकतर कंपनियां अपना डेटाबेस एवं सर्वर इसी ऑपरेटिंग सिस्टम पर रखती हैं |
  • Fast | तेज : यह ऑपरेटिंग सिस्टम बेहद सुरक्षित होने के साथ साथ काफी फ़ास्ट भी हैं यदि  आपके कंप्यूटर में RAM 256 MB है तो भी आपके कंप्यूटर में लिनक्स बहुत अच्छे से चल सकता हैं |
  • Free | निशुल्क : यह ऑपरेटिंग सिस्टम बिलकुल मुफ्त हैं, ना तो आपको इसे डाउनलोड करने के लिए पैसे देना होते हैं ना ही इंस्टाल करने के और ना ही कोई रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होती हैं | पूरी तरह निशुल्क होने के साथ साथ इसमें उपयोग किये जाने वाले सॉफ्टवेर, एप्लीकेशन आदि भी अधिकतर मुफ्त ही हैं |
  • Open source | स्वतंत्र : यह एक open source ऑपरेटिंग सिस्टम है यानि इसमें आप अपने अनुसार बदलाव कर सकते हैं, ग्नू सार्वजनीक लाइसेंस (GPL) के तहत  इसे कोई भी एडिट कर सकता हैं आप भी |
  • Run without installation | बगैर इंस्टाल किये चलायें : इसकी यह सबसे बड़ी विशेषता हैं कि आप अपने लैपटॉप या कंप्यूटर पर इसे बिना इंस्टालेशन किये इसकी पूरी विशेषताओं के साथ चला सकते हैं | इसके लिए आपको बस एक बूटेबल CD/DVD या पेन ड्राइव की आवश्यकता होती हैं | लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं : इसके फायदें एवं कमियां
ऐसे ही कई सारे फायदे हैं लिनक्स चलाने के जो हम समय समय पर इस वेबसाइट पर पढ़ते रहेंगे |

लिनक्स की कमियां | Linux ki kamiyan 

हर किसी चीज में कुछ विशेषता होती है तो कुछ कमियाँ भी ऐसी ही कुछ कमियां इस ऑपरेटिंग सिस्टम में भी हैं जो मेरी नजर में बहुत छोटी हैं |
  • Difficult | कठीन : हालाँकि इस ऑपरेटिंग सिस्टम को चलाना अब पहले जितना कठीन कार्य नहीं रह गया हैं फिर भी दुसरे ऑपरेटिंग सिस्टम से आये उपयोगकर्ताओं के लिए शुरुआत में थोडा मुश्किल कार्य हो सकता हैं |
  • Difficult settings | मुश्किल सेटिंग : इस ऑपरेटिंग सिस्टम की सेटिंग्स थोड़ी मुश्किल जरुर हैं इसी कारण हमें कुछ software इनस्टॉल करने एवं उसके बाद उन्हें चलाने में मामूली  दिक्कतों  का सामना करना पढ़ सकता हैं |
  • Software | सॉफ्टवेर : हमारे देश में अधिकतर लोग विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं इस कारण से हमें .exe फाइल या विंडोज आधारित software की जरुरत होती हैं जो Linux पर चलाना थोडा मुश्किल काम हैं |

⇒ लिनक्स कैसे इंस्टाल करें ?

तो आपने जाना कि लिनक्स क्या होता हैं, आज  के हमारे इस आर्टिकल “लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं : इसके फायदें एवं कमियां” में बस इतना ही |  आप जल्द ही Computer sikhe पर  Linux एवं अन्य विषयों पर जानकारी प्राप्त करेंगे | आप हमसे कमेंट के माध्यम से कंप्यूटर या इन्टरने से जुड़ा किसी भी तरह का सवाल पूछ सकते हैं, हम जल्द ही उसका जवाब देनें का प्रयत्न करेंगे